मुखौटे युक्त समाज.
नाज़ुक से रिस्तो मे. आये केसे मोड है हर दिल मे बसा खामोश सा एक चोर है.. नींद सुख चेन सब तेरे हवाले है. निडर निश्छल निपूर्ण है तू. जो तू इन्हे संभाले. . खामोशीओ से बोलता है. .रिस्ते त...
मै हिन्दी लेखक हूँ. . समाज की अच्छी बुरी बातों को कलम की नोक से दुनिया के सामने लाने का प्रयास करता हूँ. .