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लेखक कैसे बने (नज़रिया )

में भूल जाता हूँ. तेरे वादे,  इरादे, जो किये थे तूने. . आधे-आधे. . ये पक्तिया अकेलेपन में. . . बिना आवाज के अक्सर बोली जाती हैं. . जब जान होने वाले अनजान हो जाते है. . . शायद गम को छुपा लेती ह...

मुखौटे युक्त समाज.

नाज़ुक से रिस्तो  मे. आये केसे  मोड है हर दिल मे बसा खामोश सा एक चोर है.. नींद सुख चेन सब तेरे हवाले है. निडर निश्छल निपूर्ण है तू. जो तू इन्हे संभाले. . खामोशीओ से बोलता है. .रिस्ते त...

मै कवि हूँ .. ख्वाब बेचता हूँ

मै कवि हु. . ख्वाब बेचता हूँ ! सपने बेचता हूँ, में अहसास बेचता हूँ . जो लिखा है वो में बेबाक बेचता हूँ  . . निश्चित ही नहीं, अनिश्चित भी बेचता हूँ में. . समाझ का अच्छा बुरा-बुरा हर अहसास ...

खुदा और में

तू मेरा खुदा होता. जो तू मेरे से जुदा ना होता. . पीता मै तेरे आँखों से वो आस्क जो तू मेरा होता. .. मांग लेता तेरे लिए वो तमाम सुख़ और खुशियाँ जो तो मांग लेता मुझे अपनी दुआ में तो किया म...

उसकी एक मुस्कान

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नज़रे झुक जाती है. लफ़्ज़ों पे ख़ामोशी फैल जाती है जब वो रूठ जाती है कोशिश हजारों जब कोई रंग ना लाती है दुनिया ही बेरंग हो जाती है जब वो रूठ जाती है. . उसकी एक मुस्कान के खो जाने पर कोसा जाता है. दुनिया की तमाम अच्छी उपमाओ को उसे परोसा जाता है. . कोशिश की जाती है उसे मनाने की. . उसके रूठे होठो पे वो हसीन मुस्कान लाने की. . जब वो रूठ जाती है.  !

मेरी ख़ामोशी बोल देती है.

मै रहता हूँ खामोश, मदहोश, मदमस्त जमाने की सारी कही-अनकही बातो से दुर पर जब बातो ही बातो में बात तेरी आती है ख़ामोशी मेरी बोल देती है। बेशक ना तुझें सुनाई देती है ना तू सुन पाती ह...