लेखक कैसे बने (नज़रिया )
में भूल जाता हूँ. तेरे वादे, इरादे, जो किये थे तूने. . आधे-आधे. . ये पक्तिया अकेलेपन में. . . बिना आवाज के अक्सर बोली जाती हैं. . जब जान होने वाले अनजान हो जाते है. . . शायद गम को छुपा लेती ह...
मै हिन्दी लेखक हूँ. . समाज की अच्छी बुरी बातों को कलम की नोक से दुनिया के सामने लाने का प्रयास करता हूँ. .